देवी पूजा नियमदेवी की पूजा में ब्राह्म मुहूर्त का क्या विशेष महत्व है?सात्विक ऊर्जा अधिकतम। सप्तशती, नवार्ण जप विशेष फलदायी। काली/भैरवी = रात्रि। संध्या भी शुभ। नियमितता प्रधान।#ब्रह्ममुहूर्त#देवी#विशेष
मंत्र जप नियमब्राह्म मुहूर्त में मंत्र जप करने से क्या विशेष लाभ मिलता है?सात्विक ऊर्जा अधिकतम, मन शांत, प्राण शुद्ध, 'ब्रह्म' काल = ब्रह्म संवाद। कुछ ग्रंथ: 100 गुना फल। नियमितता = दीर्घकालिक। 'ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत्।'#ब्रह्ममुहूर्त
स्तोत्र एवं पाठमंगल आरती क्या होती है कैसे करेंदिन की प्रथम आरती; ~4:00-5:30 AM; भगवान को 'जगाना।' शंख→दीपक→आरती→भोग→फूल। घर: प्रातः दीपक+आरती=मंगल आरती।#मंगल आरती#प्रातः#प्रथम
दैनिक आचारप्रातः काल उठकर सबसे पहले कौन सा मंत्र बोलेंकरदर्शन: 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।' फिर भूमि स्पर्श: 'समुद्रवसने देवि... पादस्पर्शं क्षमस्व मे।' क्रम: करदर्शन → भूमि प्रार्थना → शौच → स्नान।#प्रातः#पहला मंत्र#करदर्शन
व्रत विधिकार्तिक स्नान कितने बजे करना चाहिए?कार्तिक स्नान: ब्रह्म मुहूर्त (4:00-4:30) सर्वोत्तम, अरुणोदय (5:00-5:30) उत्तम, सूर्योदय (6:00-6:30) मध्यम। अंतिम=सूर्योदय+1 घण्टा। ठंडा जल=तप। 30 दिन निरंतर।#कार्तिक स्नान#समय#ब्रह्म मुहूर्त
शिव पूजा नियमशिव की पूजा में ब्राह्म मुहूर्त का क्या विशेष महत्व है?सूर्योदय ~96 मिनट पूर्व। सात्विक ऊर्जा अधिकतम, मन शांत, प्राणवायु शुद्ध। 'ब्रह्म' मुहूर्त = शिव (ब्रह्म) का समय। कुंडलिनी ध्यान सर्वाधिक प्रभावी। महाकालेश्वर भस्म आरती इसी समय।#ब्रह्ममुहूर्त#समय#विशेष
शिव पूजा नियमशिव की पूजा सूर्योदय से पहले करनी चाहिए या बाद में?ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से पहले 4-5:30 AM) सर्वोत्तम। सूर्योदय बाद प्रातःकाल भी पूर्णतः शुभ। संध्या (प्रदोष) भी शुभ। शिव = महाकाल, समय से परे — नियमितता > विशिष्ट समय।#सूर्योदय#समय#ब्रह्ममुहूर्त
मंदिर ज्ञानमंदिर में मंगला आरती सबसे पहले क्यों होती है?भगवान जागरण ('शुभ प्रभात'), ब्रह्ममुहूर्त (सबसे सात्विक), 'मंगला'=शुभ (दिन शुभ), ब्रह्मांड जाग रहा। पहला भक्त = विशेष कृपा। तिरुमला=3AM, काशी=3:30।#मंगला#आरती#पहले