विस्तृत उत्तर
मंगल आरती = दिन की प्रथम आरती; प्रातः ब्रह्म मुहूर्त/सूर्योदय पूर्व।
क्या: भगवान को 'जगाना' (शयन से उठाना)। देवता रात्रि विश्राम → प्रातः मंगल आरती = प्रथम दर्शन।
समय: ~4:00-5:30 AM (मंदिर/ऋतु अनुसार)।
कैसे: शंख/घंटा → दीपक जलाएं → मंगल गीत/आरती → भोग (फल/मिठाई/दूध) → तुलसी/फूल अर्पित।: 'श्रीश्री गुरु गौरांग...' मंगलाचरण।
घर पर: प्रातः पूजा में दीपक + आरती = घर की मंगल आरती। 'ॐ जय जगदीश हरे' या इष्ट आरती।





