विस्तृत उत्तर
अनिवार्य नहीं, परंतु अत्यंत शुभ।
शास्त्रीय: विशेष अनुष्ठान (सप्तशती पाठ, सहस्रनाम, लघुरुद्र) = पूर्णाहुति + दान + ब्राह्मण भोज = पूर्ण विधि।
दैनिक पाठ: हनुमान चालीसा, स्तोत्र = दान अनिवार्य नहीं। परंतु यथासंभव दान = फल बढ़ाता है।
दान = पुण्य गुणक: पाठ + दान = पाठ फल कई गुना। गरीब भोजन/वस्त्र/धन = सर्वोत्तम दान।
सार: दैनिक = अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान = अनुशंसित। संभव हो तो सदैव करें — 'दान = फल गुणक।'





