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विस्तृत उत्तर
मधु और कैटभ ने महामाया से इच्छा-मृत्यु का वरदान मांगा था। उन्होंने प्रार्थना की कि कोई देवता, असुर, यक्ष, गंधर्व या स्वयं काल भी उन्हें तब तक न मार सके जब तक वे स्वयं मृत्यु स्वीकार न करें। यह वरदान उन्हें लगभग अजेय बना देता था, क्योंकि उनकी मृत्यु उनकी अपनी इच्छा पर निर्भर हो गई थी। वरदान मिलने के बाद वे अत्यंत अहंकारी हो गए और ब्रह्मा जी से वेदों को छीन लिया। अंत में भगवान विष्णु ने उनकी इसी शर्त को बुद्धि और महामाया की सहायता से उनके विरुद्ध कर दिया।
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