देवी पूजा
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देवी की पूजा में कपूर और लोबान किस क्रम में जलाएं?
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संक्षिप्त उत्तर
क्रम: पहले लोबान/धूप (पूजा मध्य, वातावरण शुद्धि) → बाद में कपूर (आरती, पूजा समापन)। लोबान = नकारात्मकता नाश। कपूर = शुद्धता प्रतीक (पूर्ण जलकर अवशेष शून्य = आत्म-समर्पण)। शुद्ध/प्राकृतिक प्रयोग करें।
देवी पूजा में कपूर और लोबान दोनों का विशेष महत्व है: क्रम: 1। पहले धूप/लोबान — पूजा के मध्य में, देवी को सुगंधित धूप दिखाने के लिए।
यह षोडशोपचार में 'धूप' उपचार है। बाद में कपूर — आरती के समय। कपूर जलाकर आरती करना पूजा का समापन अंग है।
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