विस्तृत उत्तर
देवी पूजा में कपूर और लोबान दोनों का विशेष महत्व है:
क्रम
- 1पहले धूप/लोबान — पूजा के मध्य में, देवी को सुगंधित धूप दिखाने के लिए। यह षोडशोपचार में 'धूप' उपचार है।
- 2बाद में कपूर — आरती के समय। कपूर जलाकर आरती करना पूजा का समापन अंग है।
लोबान (गुग्गल/धूप)
- ▸लोबान = प्राकृतिक राल/धूप (गुग्गल, लोबान, चंदन धूप)।
- ▸वातावरण शुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा नाश।
- ▸कोयले पर रखकर या धूपदानी में जलाएं।
- ▸देवी को दिखाकर पूरे पूजा स्थल में घुमाएं।
कपूर
- ▸कपूर = शुद्धता और आत्म-समर्पण का प्रतीक (पूर्णतः जलकर कोई अवशेष नहीं छोड़ता)।
- ▸आरती में कपूर जलाकर देवी की आरती करें।
- ▸कपूर की ज्योत = आत्मा का प्रकाश।
सार: धूप/लोबान → पूजा मध्य (वातावरण शुद्धि)। कपूर → आरती (पूजा समापन)।
ध्यान रखें: शुद्ध/प्राकृतिक कपूर और लोबान प्रयोग करें — रासायनिक नहीं।





