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देवी पूजा📜 पूजा विधि, षोडशोपचार, आगम शास्त्र1 मिनट पठन

देवी की पूजा में कपूर और लोबान किस क्रम में जलाएं?

संक्षिप्त उत्तर

क्रम: पहले लोबान/धूप (पूजा मध्य, वातावरण शुद्धि) → बाद में कपूर (आरती, पूजा समापन)। लोबान = नकारात्मकता नाश। कपूर = शुद्धता प्रतीक (पूर्ण जलकर अवशेष शून्य = आत्म-समर्पण)। शुद्ध/प्राकृतिक प्रयोग करें।

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विस्तृत उत्तर

देवी पूजा में कपूर और लोबान दोनों का विशेष महत्व है:

क्रम

  1. 1पहले धूप/लोबान — पूजा के मध्य में, देवी को सुगंधित धूप दिखाने के लिए। यह षोडशोपचार में 'धूप' उपचार है।
  2. 2बाद में कपूर — आरती के समय। कपूर जलाकर आरती करना पूजा का समापन अंग है।

लोबान (गुग्गल/धूप)

  • लोबान = प्राकृतिक राल/धूप (गुग्गल, लोबान, चंदन धूप)।
  • वातावरण शुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा नाश।
  • कोयले पर रखकर या धूपदानी में जलाएं।
  • देवी को दिखाकर पूरे पूजा स्थल में घुमाएं।

कपूर

  • कपूर = शुद्धता और आत्म-समर्पण का प्रतीक (पूर्णतः जलकर कोई अवशेष नहीं छोड़ता)।
  • आरती में कपूर जलाकर देवी की आरती करें।
  • कपूर की ज्योत = आत्मा का प्रकाश।

सार: धूप/लोबान → पूजा मध्य (वातावरण शुद्धि)। कपूर → आरती (पूजा समापन)।

ध्यान रखें: शुद्ध/प्राकृतिक कपूर और लोबान प्रयोग करें — रासायनिक नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
पूजा विधि, षोडशोपचार, आगम शास्त्र
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