देवी की पूजा में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
सिद्ध कुंजिका = सप्तशती की 'कुंजी'। शिव वचन: 'कुंजिका बिना सप्तशती निष्फल।' इसे पढ़ने से कवच, अर्गला, कीलक — सब अंगपाठ का फल मिलता है। रुद्रयामल तंत्र से। बीज मंत्रों (ऐं, ह्रीं, क्लीं) का संग्रह। सप्
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। इसे सप्तशती की 'कुंजी' (key) कहा गया है।
शास्त्रीय स्थान: - सिद्ध कुंजिका स्तोत्र भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को बताया गया है। - इसका स्रोत रुद्रयामल तंत्र माना जाता है।