देवी ग्रंथ
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देवी रात्रि सूक्त का पाठ कब करना चाहिए?
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संक्षिप्त उत्तर
रात्रि सूक्त = ऋग्वेद (10.127) + सप्तशती अंग। पाठ समय: सायंकाल/रात्रि, शयन पूर्व, नवरात्रि जागरण, अमावस्या। भय निवारण: रात्रि भय, बुरे स्वप्न में विशेष। फल: भय मुक्ति, नकारात्मकता से रक्षा, शांत निद्र
रात्रि सूक्त (रात्रि देवी सूक्त) ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध सूक्त है और दुर्गा सप्तशती के अंगपाठ में भी सम्मिलित है।
रात्रि सूक्त का परिचय: - ऋग्वेद, मण्डल 10, सूक्त 127 में वर्णित। - इसमें रात्रि को देवी के रूप में स्तुति की गई है।
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