देवी साधना में ब्रह्मचर्य का पालन क्यों आवश्यक है?
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संक्षिप्त उत्तर
ऊर्जा संरक्षण (ओजस→कुंडलिनी)। मन शुद्धि = मंत्र तीव्र। देवी = पवित्रता — अपवित्र साधक अप्रसन्न। तंत्र: बिना ब्रह्मचर्य = विफल/विपरीत। अनुष्ठान काल अनिवार्य।
देवी साधना में ब्रह्मचर्य आवश्यक: 1। ऊर्जा संरक्षण: वीर्य = ओजस = आध्यात्मिक ऊर्जा।
ब्रह्मचर्य = ऊर्जा ऊर्ध्वगमन → कुंडलिनी जागरण → देवी शक्ति ग्रहण। मन शुद्धि: काम वासना = मन अशुद्ध। अशुद्ध मन = मंत्र शक्ति कम।