देवी भागवत पुराण में सृष्टि रचना का क्या वर्णन है?
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संक्षिप्त उत्तर
देवी भागवत पुराण (तीसरा स्कंध): सृष्टि के आरंभ में केवल निर्गुण-निराकार परब्रह्म था। सृष्टि की इच्छा हुई → परब्रह्म ने स्वयं को दो भागों में विभक्त किया: बायाँ भाग = स्त्री (प्रकृति/शक्ति), दायाँ भाग
श्रीमद्देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कंध में स्पष्ट किया गया है कि सृष्टि के आरंभ में जब कुछ भी नहीं था, तब केवल निर्गुण, निराकार और निरंजन परब्रह्म का ही अस्तित्व था।
उस परब्रह्म ने जब सृष्टि की रचना करने की इच्छा (संकल्प) की, तब उसने स्वयं को दो भागों में विभक्त कर लिया — बायाँ भाग स्त्री (प्रकृति/शक्ति) बन गया और दायाँ भाग पुरुष (ब्रह्म/काल/शिव) बन गया।