देवी महात्म्य में महामाया की स्तुति कैसे की गई है?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
देवी महात्म्य (मार्कण्डेय पुराण): ब्रह्मा की स्तुति — 'त्वं स्वाहा त्वं स्वधा... त्वं महामाया, जगदम्बिका।' अर्थ: हे देवि! आप स्वाहा-स्वधा, महान विद्या, महामाया और जगत की अंबिका हैं। देवी भागवत: त्रिदे
महामाया का उल्लेख प्रमुखतः मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य में मिलता है। वहाँ ब्रह्माजी कहते हैं: 'त्वं स्वाहा त्वं स्वधा।
त्वं महामाया, जगदम्बिका' अर्थात् हे देवि, आप ही स्वाहा-स्वधा हैं, आप ही महान विद्या, महामाया और जगत की अंबिका (माता) हैं।