देवीसूक्त पाठ का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त है। नवरात्रि के नौ दिन, अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी तिथियों पर पाठ विशेष फलदायी है। स्नान के बाद पूर्वमुख बैठकर शुद्ध मन से पाठ करें।
देवीसूक्त ऋग्वेद का एक महत्वपूर्ण सूक्त है जिसमें देवी ने स्वयं अपनी महिमा का प्रकटन किया है — इसे 'वाक् सूक्त' भी कहते हैं क्योंकि इसमें वाक् देवी स्वयं बोलती हैं।