धर्मराज चित्रगुप्त के लेखे से पाप-पुण्य तौलकर नरक का निर्धारण करते हैं। गरुड़ पुराण में 84 लाख नरक हैं — हर पाप के लिए अलग नरक। यह दंड अस्थायी है — पाप-दंड पूरा होने पर पुनर्जन्म होता है।
गरुड़ पुराण में धर्मराज (यमराज) द्वारा दंड देने की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है। यह दंड-व्यवस्था पूर्णतः कर्मों पर आधारित है।
दंड की प्रक्रिया — चित्रगुप्त द्वारा कर्मों का लेखा प्रस्तुत होने के बाद धर्मराज पाप-पुण्य का तुलनात्मक मूल्यांकन करते हैं।