उपसंहार
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धातु साधना में भाव शुद्धि का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
शास्त्र में भाव शुद्धि द्रव्य शुद्धि से ऊपर है — बिना श्रद्धा के स्वर्ण श्रीयंत्र भी रेखाचित्र है और अष्टधातु प्रतिमा पाषाण तुल्य। परमात्मा भाव के भूखे हैं, वैभव के नहीं।
किन्तु, हमें यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि ये सभी साधन और विधियां तभी फलित होती हैं, जब इनके मूल में भक्त की सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव हो।
शास्त्रों में 'भाव शुद्धि' को 'द्रव्य शुद्धि' से भी ऊपर स्थान दिया गया है।
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