ध्यान में मन भटकना स्वाभाविक है — गीता में अर्जुन ने भी यही कहा। उपाय — श्वास पर ध्यान, भटकने पर मन को डाँटे नहीं धीरे वापस लाएँ, नाम-जप साथ रखें, छोटे सत्रों से शुरू करें, नियमितता बनाए रखें।
ध्यान में मन भटकना — यह हर साधक का अनुभव है। जो ध्यान करता है, केवल वही यह अनुभव करता है — जो करता ही नहीं वह इसे नहीं जानता।
इसलिए यह प्रश्न उठना ही साधना की शुरुआत का संकेत है।