असितांग भैरव मंत्र
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असितांग भैरव के ध्यान श्लोक का क्या अर्थ है?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान श्लोक का अर्थ: रक्त ज्वाला जटा, तेजस्वी, शूल-कपाल-पाश-डमरू धारी, श्वान वाहन, त्रिनेत्र, क्षेत्रस्य पालम् — वे साधक के परिवेश और शरीर की रक्षा करते हैं।
असितांग भैरव के ध्यान श्लोक का अर्थ: यह श्लोक असितांग भैरव को: • रक्त की ज्वाला जैसी जटाओं वाला • रक्त के समान तेजस्वी • शूल, कपाल, पाश और डमरू धारण करके लोकों की रक्षा करने वाले • निर्वाण स्वरूप, श्
उनके क्षेत्रपालक होने का अर्थ है कि वे साधक के परिवेश और शरीर की रक्षा करते हैं।
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