ध्यान
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ध्यान करने से आध्यात्मिक विकास कैसे होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान से आध्यात्मिक विकास: मांडूक्योपनिषद — जाग्रत → स्वप्न → सुषुप्ति → तुरीय (ब्रह्म-साक्षात्कार)। गीता (13.24): ध्यान से आत्म-दर्शन। योग वशिष्ठ: 7 ज्ञान-भूमिकाएँ। भागवत: शुद्ध चित्त में भगवद्-साक्ष
ध्यान आध्यात्मिक विकास का सर्वाधिक प्रत्यक्ष मार्ग है। शास्त्रीय आधार: भागवत पुराण (3। 1): 'ध्यानं विशुद्धसत्त्वस्य।
' — शुद्ध अंतःकरण में ध्यान से भगवान का साक्षात्कार होता है। चेतना के स्तर (मांडूक्योपनिषद): 1। जाग्रत — स्थूल जगत की अनुभूति 2।
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