ध्यान में स्थूल से सूक्ष्म की यात्रा — शरीर → श्वास → मन → बुद्धि → चेतना — के क्रम में आत्मज्ञान मिलता है। गीता (6/20-21) में समाधि में आत्मा को आत्मा से देखना ही आत्मज्ञान है। 'नेति नेति' विचार से ज
ध्यान करने से आत्मज्ञान कैसे मिलता है? आत्मज्ञान की परिभाषा: आत्मज्ञान = 'मैं शरीर-मन नहीं, शुद्ध चेतना हूँ' — इसका प्रत्यक्ष अनुभव।
यह बौद्धिक समझ नहीं — यह अपरोक्षानुभूति है। ध्यान से आत्मज्ञान मिलने की प्रक्रिया: 1।