ध्यान
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ध्यान करने से आत्मिक शांति कैसे मिलती है?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान से शांति: पतञ्जलि — चित्त-वृत्ति-निरोध → द्रष्टा स्वरूप में स्थित। गीता (6.15): नित्य ध्यानी को 'निर्वाण-परम शांति'। क्रम: ध्यान → विचार मंद → प्रतिक्रिया कम → अहंकार शमन → आत्म-बोध → शांति।
ध्यान से आत्मिक शांति का संबंध चित्त की वृत्तियों के निरोध से है। शास्त्रीय व्याख्या: पतञ्जलि योगसूत्र (1। 2-3): 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।
तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्। ' — जब चित्त की वृत्तियाँ रुकती हैं, तब द्रष्टा (आत्मा) अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है — यही शांति है।
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