ध्यान
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ध्यान करने से कर्म कैसे शुद्ध होते हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान से कर्म-शुद्धि: गीता (4.37): ज्ञानाग्नि सभी कर्म भस्म करती है। चार स्तर: क्रियमाण (सात्विक बनना), आगामी (अबंधनकारी), संचित (संस्कार नष्ट), प्रारब्ध (शीघ्र क्षय)। योगसूत्र: समाधि-भावना → क्लेश-तन
ध्यान से कर्म-शुद्धि का वर्णन भागवत, गीता और योगसूत्र में विस्तार से मिलता है। शास्त्रीय प्रमाण: भागवत पुराण (11।
19): 'ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना। ' — ध्यान से आत्मा को देखने पर कर्म-बंधन शिथिल होते हैं।
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