ध्यान अनुभव
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ध्यान करते समय शरीर में विद्युत प्रवाह जैसा अनुभव क्यों होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
प्राण ऊर्जा (72,000 नाड़ी), कुंडलिनी (अमर उजाला: 'बिजली कौंधना'), नाड़ी शुद्धि (block), चक्र सक्रिय। रीढ़=कुंडलिनी, हथेली=प्राण। सामान्य+शुभ! दर्दनाक=गुरु।
विद्युत प्रवाह = प्राण/कुंडलिनी: अमर उजाला: कुंडलिनी = 'बिजली कौंधने और मेघों के गरजने जैसी अनुभूति।
प्राण ऊर्जा: नाड़ियों में प्राण प्रवाह = विद्युत जैसा (72,000 नाड़ी)। कुंडलिनी: मूलाधार→ऊपर = रीढ़ में विद्युत = सबसे तीव्र।
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