ध्यान में श्वास पर इसलिए ध्यान दिया जाता है क्योंकि — 'चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्' (हठयोग प्रदीपिका 2/2) — श्वास स्थिर होने से मन स्थिर होता है। श्वास सदा वर्तमान में है, मन का द्वार है
ध्यान के दौरान सांस पर ध्यान क्यों दिया जाता है? श्वास और मन का अभिन्न सम्बन्ध: हठयोग प्रदीपिका (2/2) में कहा गया है: *'चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्।
'* — श्वास चलती है तो मन चलता है; श्वास स्थिर होती है तो मन स्थिर होता है। यह श्वास और मन का मूल नियम है।