ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शां
ध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें? ध्यान की परिभाषा: पतंजलि योगसूत्र (3/2) में कहा गया है: *'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्।
'* — किसी एक विषय पर चित्त का अविच्छिन्न, एकाग्र प्रवाह ही ध्यान है।