ध्यान साधना
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ध्यान में अहंकार का विलय कैसे होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
रमण: 'मैं कौन?' → खोजो → मिलता नहीं → विलय। साक्षी ('मैं=विचार/शरीर नहीं'), समर्पण ('तेरी इच्छा'), सेवा, निर्विकल्प। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' 'अहंकार विलय=मोक्ष।'
अहंकार विलय = ध्यान सर्वोच्च लक्ष्य: कैसे: 1।
'मैं कौन?' (रमण महर्षि): 'मैं कौन हूं?' = आत्मविचार → 'मैं' खोजो → मिलता नहीं → 'मैं' = विलय → आत्मा = शेष।
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