ध्यान साधना
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ध्यान में द्रष्टा और दृश्य का भेद कैसे अनुभव करें?
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संक्षिप्त उत्तर
पतंजलि (2.17): 'द्रष्टा+दृश्य भेद=मुक्ति।' विचार/शरीर/भावना=दृश्य। 'कौन देख रहा?'=मैं=द्रष्टा=आत्मा। रमण: 'मैं कौन?'=शरीर/मन/बुद्धि नहीं=द्रष्टा।
द्रष्टा (देखने वाला) vs दृश्य (जो दिखता) — मूल भेद: पतंजलि: - (2। 17): 'द्रष्टृदृश्ययोः संयोगो हेयहेतुः' — 'द्रष्टा+दृश्य संयोग = दुख कारण।
3): 'तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्' — ध्यान = द्रष्टा स्वरूप।
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