ध्यान अनुभव
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ध्यान में निर्विकल्प समाधि का अनुभव कैसा होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
'मैं' शून्य, विषय-वस्तु-ज्ञाता=एक, अनंत, सत्-चित्-आनंद, शब्दातीत। पतंजलि: 'द्रष्टा स्वरूप स्थित।' 1 क्षण = कृतार्थ। स्थिर = अत्यंत दुर्लभ (रामकृष्ण)।
निर्विकल्प समाधि = ध्यान सर्वोच्च अवस्था: अनुभव (शब्दों से परे — फिर भी): 1। 'मैं' नहीं: अहंकार = शून्य। 'मैं ध्यान कर रहा' = नहीं।
विषय-वस्तु-ज्ञाता = एक: देखने वाला + दिखने वाला + देखना = एक। अनंत: समय/स्थान = नहीं। परमानंद: सांसारिक सुख × ∞ = फिर भी कम।
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