ध्यान अनुभव
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ध्यान में सांस रुक जैसी लगती है — क्या सामान्य है?
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संक्षिप्त उत्तर
केवली कुंभक (पतंजलि 2.51) = सर्वोच्च प्राणायाम। मन शून्य→श्वास↓, सुषुम्ना सक्रिय, समाधि निकट। वास्तव में रुकती नहीं (सूक्ष्म)। जबरदस्ती≠केवली (खतरनाक)। शुभ!
सांस रुकना = केवली कुंभक — उन्नत + सामान्य: पतंजलि (2।
51): चौथा प्राणायाम = 'बाह्य+आभ्यंतर विषय से परे' = केवली कुंभक = श्वास स्वतः रुकना = सर्वोच्च।
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