ध्यान अनुभव
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ध्यान में शून्य अवस्था का क्या अर्थ है?
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संक्षिप्त उत्तर
विचार/इंद्रिय/अहंकार शून्य = शुद्ध चेतना। पतंजलि: 'चित्तवृत्तिनिरोध'। तुरीय (4वीं अवस्था)। शून्य = पूर्ण (ब्रह्म)। समाधि द्वार। नींद नहीं — जागरूक+शून्य = सच्चा।
शून्य = ध्यान सर्वोच्च — समाधि द्वार: क्या है: विचार शून्य। 'मैं' नहीं — केवल 'है'। न प्रकाश, न अंधकार — शुद्ध चेतना।
पतंजलि: 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (1। 2) — चित्त वृत्ति (विचार) निरोध = योग = शून्य अवस्था। निर्विचार: विचार बंद = शून्य = ध्यान सफल।
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