ध्यान अनुभव
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ध्यान में तुरीय अवस्था क्या होती है?
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संक्षिप्त उत्तर
चौथी अवस्था: जाग्रत/स्वप्न/सुषुप्ति से परे = शुद्ध चेतना। माण्डूक्य: 'न भीतर न बाहर = आत्मा = ब्रह्म।' ॐ = अ+उ+म+शून्य — शून्य = तुरीय। ध्यान: शरीर भूला+विचार बंद+जागरूक।
तुरीय = चौथी अवस्था — 'ॐ' का चौथा मात्रा: 3 + 1 अवस्थाएं: 1। जाग्रत (अ): बाहरी दुनिया = चेतन। स्वप्न (उ): भीतरी दुनिया = अवचेतन।
सुषुप्ति (म): गहरी नींद = अचेतन (शून्य किन्तु अजागरूक)। तुरीय (शून्य/अमात्रा): तीनों से परे = शुद्ध चेतना = जागरूक + शून्य।
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