दीक्षा से पूर्व पूजा का महत्व
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दीक्षा की पूजा में 'साक्षी भाव' का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
साक्षी भाव में गुरु-मंडल, इष्ट-देवता, पंचमहाभूत और दिव्य शक्तियों को साक्षी बनाया जाता है — यह गुरु-शिष्य के आध्यात्मिक अनुबंध को प्रमाणित करता है। पूजा का दीप अग्निदेव का प्रतीक है जो पवित्र कर्मों क
पूजा के माध्यम से गुरु-मंडल (संपूर्ण गुरु-परंपरा), शिष्य के इष्ट-देवता, पंचमहाभूत और अन्य दिव्य शक्तियों को इस पवित्र संस्कार का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
यह केवल एक औपचारिक निमंत्रण नहीं है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक अनुबंध को प्रमाणित और पवित्र करता है जो गुरु और शिष्य के मध्य स्थापित हो रहा है।
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