विस्तृत उत्तर
पूजा के माध्यम से गुरु-मंडल (संपूर्ण गुरु-परंपरा), शिष्य के इष्ट-देवता, पंचमहाभूत और अन्य दिव्य शक्तियों को इस पवित्र संस्कार का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
यह केवल एक औपचारिक निमंत्रण नहीं है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक अनुबंध को प्रमाणित और पवित्र करता है जो गुरु और शिष्य के मध्य स्थापित हो रहा है।
स्वयं पूजा में प्रज्वलित 'दीप' अग्निदेव का प्रतीक है, जो सभी यज्ञों और पवित्र कर्मों के प्रमुख साक्षी माने जाते हैं और आहुतियों को देवताओं तक पहुंचाते हैं।





