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साक्षी भाव से जुड़े सभी प्रश्न(4)

साक्षी भाव पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दीक्षा से पूर्व पूजा का महत्व

दीक्षा की पूजा में 'साक्षी भाव' का क्या महत्व है?

साक्षी भाव में गुरु-मंडल, इष्ट-देवता, पंचमहाभूत और दिव्य शक्तियों को साक्षी बनाया जाता है — यह गुरु-शिष्य के आध्यात्मिक अनुबंध को प्रमाणित करता है। पूजा का दीप अग्निदेव का प्रतीक है जो पवित्र कर्मों के प्रमुख साक्षी हैं।

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दीक्षा से पूर्व पूजा का महत्व

दीक्षा से पहले पूजा क्यों की जाती है?

दीक्षा से पहले पूजा तीन उद्देश्यों के लिए: (1) साक्षी भाव — गुरु-मंडल और दिव्य शक्तियों को साक्षी बनाना, (2) दिव्य कवच — नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, (3) देव-परंपरा से अनुमति और आशीर्वाद।

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साक्षी मंत्र

साक्षी मंत्र क्या होता है?

साक्षी मंत्र दो अर्थों में: (1) अनुष्ठानिक — दिव्य साक्षियों का आवाहन करने वाले मंत्र, (2) दार्शनिक — साक्षी भाव में जपा गया कोई भी मंत्र जो मन का लंगर बनकर साधक को साक्षी स्वरूप में स्थित करे।

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साधना मार्ग

साक्षी भाव ध्यान कैसे करें?

साक्षी भाव ध्यान में विचारों और भावनाओं को न रोकें, न उनमें डूबें — बल्कि उन्हें निष्पक्ष दर्शक की तरह देखें। 'मैं विचारों का साक्षी हूँ, विचार मैं नहीं हूँ' — यही मूल भाव है। योगसूत्र 1.3: 'तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्' — वृत्ति-शांति पर साक्षी स्वरूप में स्थिति।

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