विस्तृत उत्तर
किसी भी पवित्र कार्य के शुभारंभ से पूर्व ईश्वरीय शक्तियों का आवाहन एक अनिवार्य विधान है। दीक्षा के पूर्व की जाने वाली पूजा में यह आवाहन कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति करता है:
- 1साक्षी भाव का निर्माण: गुरु-मंडल, इष्ट-देवता, पंचमहाभूत और दिव्य शक्तियों को इस पवित्र संस्कार का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह उस आध्यात्मिक अनुबंध को प्रमाणित और पवित्र करता है जो गुरु और शिष्य के मध्य स्थापित हो रहा है।
- 1पवित्र एवं सुरक्षित क्षेत्र का निर्माण: दिव्य शक्तियों की उपस्थिति उस स्थान को अभिमंत्रित कर एक शक्तिशाली ऊर्जा क्षेत्र में बदल देती है जो दीक्षा की प्रक्रिया को नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।
- 1अनुमति एवं आशीर्वाद की प्राप्ति: पूजा के माध्यम से गुरु और शिष्य संपूर्ण देव-परंपरा से इस कार्य को संपन्न करने की अनुमति और आशीर्वाद मांगते हैं।





