दिव्य दृष्टि वह आत्मिक शक्ति है जिससे सूक्ष्म और दैवीय सत्य देखा जाता है। मृत्यु के समय इंद्रियाँ शिथिल होने पर यह स्वतः मिलती है। इसमें व्यक्ति अपना जीवन और आत्मा का वास्तविक स्वरूप देख सकता है।
सनातन धर्म में 'दिव्य दृष्टि' उस विशेष आत्मिक क्षमता को कहते हैं जिसमें साधारण भौतिक आँखों से परे — सूक्ष्म, आध्यात्मिक और दैवीय सत्य को देखने की शक्ति प्राप्त होती है।
यह केवल मृत्यु के समय नहीं, बल्कि उच्च कोटि के साधकों को जीवनकाल में भी प्राप्त हो सकती है।