दिव्य दृष्टि में व्यक्ति अपना पूरा जीवन एक क्षण में देखता है। पुण्यात्मा को दिव्य प्रकाश और पूर्वज दिखते हैं, पापी को यमदूत और भयावह दृश्य। आत्मा अपने शरीर को बाहर से भी देख सकती है।
गरुड़ पुराण में इस विषय का विस्तृत वर्णन मिलता है।
जब मृत्यु के अंतिम क्षणों में दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है, तो व्यक्ति अनेक अनुभव एक साथ करता है।