शरीर के प्रत्येक अंग पर देवी का रक्षा कवच। 6 दिशाओं से सुरक्षा। नकारात्मक ऊर्जा, तांत्रिक बाधा, ग्रह दोष, शत्रु, भय से मुक्ति। सप्तशती में अनिवार्य। स्वतंत्र दैनिक पाठ भी शुभ।
देवी कवचम् (दुर्गा सप्तशती का अंग) — शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा: सुरक्षा: - शारीरिक: मस्तक = चंडिका, ललाट = शूलधारिणी, नेत्र = खड्गिनी।
प्रत्येक अंग पर देवी का एक रूप रक्षा करता है। - सर्वदिक्: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण + ऊर्ध्व-अधो — छह दिशाओं से सुरक्षा।