सप्तशती के रहस्य: कीलक रहस्य (पाठ से पहले विकीलन अनिवार्य); तीन असुर — मन के शत्रुओं के प्रतीक (मधु-कैटभ=अज्ञान, महिषासुर=काम, शुंभ-निशुंभ=अहंकार); 'या देवी सर्वभूतेषु...' — देवी सर्वव्यापी शक्ति का द
दुर्गा सप्तशती के रहस्यों का वर्णन कीलक स्तोत्र और शाक्त आगम परंपरा में मिलता है: 1।
कीलक रहस्य: सप्तशती के मंत्रों में 'कील' (खूँटी) लगी है — इसका अर्थ है कि इन मंत्रों की शक्ति बंद है।