दुर्गाष्टमी व्रत में उदयातिथि और प्रदोष काल में किसे चुनें?
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संक्षिप्त उत्तर
गृहस्थों को सामान्य व्रत के लिए सुबह (उदयातिथि) वाली अष्टमी चुननी चाहिए। लेकिन तांत्रिक और विशेष सिद्धियों के लिए शाम (प्रदोष) और रात वाली अष्टमी चुनी जाती है।
साधकों के उद्देश्य के आधार पर इसका निर्णय होता है। सामान्यतः गृहस्थों के लिए और सात्विक व्रतों में 'उदयातिथि' को प्रधानता दी जाती है।
परन्तु तांत्रिक नियमों के अनुसार, यदि साधक किसी विशेष कामना या तांत्रिक सिद्धि के लिए अनुष्ठान कर रहा है, तो 'रात्रिकालीन पूजा' का महत्व बढ़ जाता है।