इंद्र ने दुर्लभ पुष्पमाला को ऐरावत के मस्तक पर रखा → ऐरावत ने कुचला → दुर्वासा का शाप: तीनों लोक श्रीहीन। परिणाम: स्वर्ग की कांति लुप्त, वनस्पतियाँ सूखीं, यज्ञ बंद, असुरों का अधिकार।
कथा के अनुसार, महर्षि दुर्वासा ने इंद्र को अत्यंत दुर्लभ और दिव्य पुष्पमाला भेंट की।
देवराज इंद्र अपने राजसी ऐश्वर्य के मद में इतने चूर थे कि उन्होंने उस माला का उचित सम्मान नहीं किया और उसे अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर डाल दिया।