दर्शन
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द्वैत वेदांत और अद्वैत वेदांत में मूल अंतर क्या?
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संक्षिप्त उत्तर
अद्वैत (शंकर): जीव = ब्रह्म, जगत मिथ्या, ज्ञान से मोक्ष। द्वैत (मध्व): जीव ≠ ब्रह्म (सदा भिन्न), जगत सत्य, भक्ति+कृपा से मोक्ष। पंच भेद नित्य। 'तत्त्वमसि' — अद्वैत: 'तू वही है', द्वैत: 'तू उसका है।'
द्वैत और अद्वैत वेदांत दर्शन की दो प्रमुख शाखाएँ हैं जो ब्रह्म, जीव और जगत के संबंध को भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से समझाती हैं।
अद्वैत वेदांत (शंकराचार्य — 788-820 ई।
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