शकुनि की चाल में फँसे युधिष्ठिर ने सब कुछ हारने के बाद द्रौपदी को दाँव पर इसलिए लगाया क्योंकि शकुनि ने लालच दिया कि यदि वे जीते तो अपने सभी भाई और स्वयं को वापस पा लेंगे। यह उनकी महान भूल थी जो महाभार
द्युत सभा में द्रौपदी को दाँव पर लगाने की घटना महाभारत की सबसे करुण और विवादास्पद घटनाओं में से एक है।
शकुनि ने कूटनीतिपूर्वक युधिष्ठिर को जुए की चुनौती दी।