हाँ, एकादशी व्रत महिलाएँ अवश्य कर सकती हैं। मासिक धर्म के दौरान स्वयं पूजा न करें, लेकिन कथा श्रवण, भजन और भगवान स्मरण कर सकती हैं तथा चावल का त्याग करें। शुद्धि के बाद द्वादशी पर पारण करें।
हाँ, एकादशी व्रत महिलाएँ पूरी तरह से कर सकती हैं। यह व्रत स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फलदायी है।
शास्त्रों में एकादशी व्रत को सभी वर्गों और आयु के लोगों के लिए उपयुक्त बताया गया है।