गजलक्ष्मी स्वरूप में हाथियों द्वारा अभिषेक का क्या अर्थ है?
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संक्षिप्त उत्तर
हाथी = प्रज्ञा, शक्ति, राजसी वैभव, स्थिर प्रयास। जल अभिषेक = निरंतर प्रवाहित ऊर्जा, पवित्रता। रुकी हुई संपदा विष बन जाती है — प्रवाहित संपदा समाज का कल्याण करती है।
श्रीसूक्त और अन्य पौराणिक वर्णनों में गजलक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत विलक्षण है, जहाँ देवी के दोनों ओर हाथियों द्वारा स्वर्ण कलशों से जल अभिषेक करने का वर्णन प्राप्त होता है।
हाथी प्रज्ञा (बुद्धि), शक्ति, राजसी वैभव, स्थिर प्रयास और वर्षा के बादलों का प्रतीक हैं।