गजासुर ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या की और उनसे वरदान पाया कि कोई देवता, मानव या राक्षस उसे न मार सके और उसका शरीर अभेद्य हो। वरदान पाकर वह अजेय और उन्मत्त हो गया।
गजासुर ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया था।
शिव पुराण की रुद्र संहिता के पंचम खंड के अनुसार महिषासुर के पुत्र गजासुर ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने और देवताओं को परास्त करने के उद्देश्य से ब्रह्माजी की कठोर तपस्या आरंभ की।