गजेन्द्र = जीव (अहंकार में मग्न); सरोवर = संसार; ग्राह = काल/मृत्यु; परिवार = मृत्यु में सब छोड़ देते हैं। जब 'मैं-मेरा' का अहंकार त्यागकर पूर्ण समर्पण → भगवान माया रूपी मगरमच्छ से रक्षा करते हैं। गजे
आध्यात्मिक दृष्टि से यह कथा प्रत्येक जीव की आत्मकथा है।
गजेन्द्र उस 'जीव' (मनुष्य) का प्रतीक है जो शारीरिक बल, अहंकार और सांसारिक सुखों में मग्न है।