गांधारी ने विवाह के बाद जब जाना कि उनके पति धृतराष्ट्र नेत्रहीन हैं, तब पतिव्रत-धर्म की भावना से अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली — 'जब पति संसार नहीं देख सकते तो मुझे क्या अधिकार।' यह भारतीय साहित्य में आ
गांधारी का आँखों पर पट्टी बाँधना भारतीय पुराण-साहित्य में पतिव्रत-धर्म और असाधारण आत्मत्याग का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।
जब गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र से तय हुआ तब उन्हें ज्ञात नहीं था कि धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन हैं।