मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्'। उद्देश्य: बुद्धि-विवेक वृद्धि, विघ्न नाश, शिक्षा/परीक्षा सफलता, नए कार्य शुभारंभ, ग्रह शांति। 108 बार नित्य, बुधवार विशेष। दीक्षा
गणेश गायत्री मंत्र गणपति की गायत्री छंद में रचित स्तुति है: मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्' अर्थ: हम एकदन्त (गणेश) को जानते हैं, वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले) का ध
जप के उद्देश्य: 1। बुद्धि और विवेक वृद्धि — गायत्री मंत्र मूलतः बुद्धि प्रेरणा ('धीमहि', 'प्रचोदयात्') के लिए है।