नित्य साधना के लिए 108 बार (1 माला) पर्याप्त है। बुधवार और चतुर्थी को 1008 बार विशेष फलदायी है। मंत्र सिद्धि के लिए सवा लाख जप का पुरश्चरण करें। पुरश्चरण के बाद दशांश हवन 'ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा' से क
गणेश मंत्र जप की संख्या उद्देश्य और परिस्थिति के अनुसार निर्धारित होती है: नित्य साधना: - न्यूनतम: 108 बार (1 माला) — प्रतिदिन - मध्यम: 1008 बार (11 माला) — बुधवार और चतुर्थी को - उत्तम: 10,008 बार (
गणेश चतुर्थी (वार्षिक महापर्व): 10 दिनों में कुल जप: - प्रतिदिन 1008 × 10 = 10,080 जप (आदर्श) जप के नियम: 1।