गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पा
पुराणों और शास्त्रों में गंगातट पर मृत्यु को मोक्षदायक माना गया है। इसका विधान मुख्यतः काशीखण्ड, स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण में मिलता है।
गरुड़ पुराण में उल्लिखित सप्त मोक्षपुरी में काशी (वाराणसी) और हरिद्वार — दोनों गंगा के तट पर स्थित हैं।