गर्भाधान = प्रथम संस्कार (16 में से)। कब: विवाह उपरान्त ऋतुकाल में, शुभ मुहूर्त। विधि: स्नान → गणपति पूजन → हवन → विष्णु/प्रजापति आह्वान → 'विष्णुर्योनिं कल्पयतु...' मंत्र। श्रेष्ठ सन्तान प्राप्ति हेत
गर्भाधान संस्कार षोडश (16) संस्कारों में प्रथम है। यह विवाह के पश्चात् सन्तान प्राप्ति हेतु किया जाने वाला अनुष्ठान है।
कब करें: - विवाह के बाद ऋतुकाल (स्त्री के मासिक चक्र के उपरान्त) में।